Kabir
(15th century) was an Indian mystic poet and saint whose teachings emphasized devotion, simplicity, and unity. His verses, written in vernacular language, challenge religious orthodoxy and promote spiritual understanding beyond rituals. Kabir’s poetry blends Hindu and Islamic traditions, advocating for harmony and inner truth. His work continues to influence spiritual thought and literature in India and beyond.
12 quotes in this collection. Read them below, share your favourites, or follow the related links to explore similar voices.
All quotes by Kabir
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“जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान; मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।”
Meaning: कबीर कहते हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके ज्ञान से होनी चाहिए, न कि उसकी जाति या बाहरी पहचान से। -
“साईं इतना दीजिए, जा में कुटुंब समाय; मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।”
Meaning: जीवन में उतना ही चाहिए जिससे स्वयं और दूसरों का भला हो सके। -
“साईं इतना दीजिए, जा में कुटुम समाय; मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए।”
Meaning: यह दोहा संतोष और संतुलन का संदेश देता है—इतना ही धन हो जिससे जीवन ठीक से चल सके और दूसरों की मदद भी हो सके। -
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब; पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।”
Meaning: कबीर समय के महत्व पर जोर देते हैं। जो काम करना है, उसे तुरंत करना चाहिए क्योंकि भविष्य अनिश्चित है। -
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय; जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।”
Meaning: दूसरों में बुराई खोजने से पहले स्वयं के भीतर झाँकना चाहिए। -
“माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर; कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।”
Meaning: यह दोहा बताता है कि केवल बाहरी पूजा से कुछ नहीं होता, असली बदलाव मन के अंदर होना चाहिए। -
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय; जो दिल खोजा अपना, मुझसे बुरा न कोय।”
Meaning: कबीर इस दोहे में आत्मचिंतन का महत्व बताते हैं। जब हम दूसरों में बुराई खोजते हैं, तो कुछ नहीं मिलता, लेकिन जब अपने भीतर झांकते हैं, तो अपनी कमियां दिखाई देती हैं। -
“पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय; ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”
Meaning: कबीर कहते हैं कि केवल किताबें पढ़ने से ज्ञान नहीं आता, बल्कि प्रेम और अनुभव से सच्ची समझ आती है। -
“निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय; बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।”
Meaning: कबीर कहते हैं कि आलोचक हमारे सुधार में मदद करते हैं, इसलिए उन्हें अपने पास रखना चाहिए। -
“धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय; माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।”
Meaning: यह दोहा धैर्य का संदेश देता है। जीवन में हर चीज अपने समय पर ही होती है, चाहे हम कितना भी प्रयास करें। -
“मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”
Meaning: यह दोहा बताता है कि जीत और हार का निर्धारण हमारे मन से होता है। आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। -
“जहाँ दया वहाँ धर्म है, जहाँ लोभ वहाँ पाप; जहाँ क्रोध वहाँ काल है, जहाँ क्षमा वहाँ आप।”
Meaning: यह दोहा जीवन के नैतिक सिद्धांतों को दर्शाता है—दया, क्षमा और अच्छाई ही सच्चा धर्म हैं।